जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और हरित ऊर्ज (UPSC 2026 और आगे के लिए एक महत्वपूर्ण विषय)
भूमिका:
जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की समस्या नहीं है — यह हमारे समय की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। बढ़ता वैश्विक तापमान, अनिश्चित मानसून, बार-बार आने वाली बाढ़ और सूखा, तथा जैव विविधता की हानि मानव विकास की दिशा को बदल रहे हैं।
भारत के लिए ये केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक, सामाजिक और नैतिक मुद्दे भी हैं, जो UPSC परीक्षा के लगभग हर पेपर में दिखाई देते हैं — GS Paper I (भूगोल, समाज) से लेकर GS Paper III (पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, तकनीक) और निबंध व नैतिकता पेपर तक।
1. भारत की जलवायु प्रतिबद्धताएँ और नेट-ज़ीरो लक्ष्य (2070 तक):
भारत ने COP26 (ग्लासगो, 2021) में 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन प्राप्त करने और 2030 तक 45% कार्बन तीव्रता घटाने का संकल्प लिया। यह भारत की पर्यावरण नीति का आधार स्तंभ है।
UPSC के लिए महत्त्व:
सीधे GS Paper III (पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध) से जुड़ा विषय।
भारत के विकास बनाम पर्यावरणीय संतुलन को दर्शाता है।
निबंध में “सतत विकास” जैसे विषयों पर उपयोगी।
साक्षात्कार में अक्सर इस लक्ष्य की व्यवहारिकता और चुनौतियों पर प्रश्न पूछे जाते हैं।
2. राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM):
2023 में शुरू किया गया यह मिशन भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखता है। इसका उद्देश्य इस्पात, उर्वरक, और परिवहन जैसे क्षेत्रों का डी-कार्बोनाइजेशन है।
UPSC के लिए महत्त्व:
नवीन और तकनीकी नीति पहल, इसलिए Prelims और Mains दोनों में संभावित प्रश्न।
ऊर्जा सुरक्षा + तकनीक + जलवायु कार्यवाही — GS Paper III का केंद्र विषय।
3. अक्षय ऊर्जा का विस्तार: सौर, पवन और जैव ईंधन:
भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादक है। 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। योजनाएँ जैसे कुसुम, PM-KUSUM, राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा मिशन ग्रामीण भागीदारी को बढ़ावा दे रही हैं।
UPSC के लिए महत्त्व:
Prelims के लिए तथ्यात्मक और Mains के लिए नीतिगत विश्लेषणात्मक विषय।
कृषि और ग्रामीण विकास के साथ गहराई से जुड़ा हुआ।
ISA (International Solar Alliance) में भारत की भूमिका अंतरराष्ट्रीय संबंधों में प्रमुख है।
4. भारत पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव:
भारत में औसत तापमान में वृद्धि, अनियमित मानसून, ग्लेशियरों का पिघलना, और बार-बार चक्रवात जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। IPCC के अनुसार, 2050 तक कृषि उत्पादकता में 15–20% तक कमी संभव है।
UPSC के लिए महत्त्व:
GS Paper I (भूगोल) और GS Paper III (आपदा प्रबंधन) दोनों में प्रासंगिक।
निबंध व साक्षात्कार में “भारत की तैयारी” पर प्रश्न संभावित।
5. जैव विविधता संरक्षण और EIA सुधा
EIA (पर्यावरण प्रभाव आकलन) और राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण जैसे ढाँचे सतत विकास सुनिश्चित करते हैं। हाल के सुधार पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
UPSC के लिए महत्त्व:
पर्यावरणीय शासन कानूनों की जानकारी UPSC का स्थायी विषय।
CBD (Convention on Biological Diversity) व SDG 15 से सीधा संबंध।
6. कार्बन क्रेडिट व्यापार और हरित वित्त:
भारत ने 2023 में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) शुरू की। इससे उद्योग उत्सर्जन घटाकर क्रेडिट कमा सकते हैं। ग्रीन बॉन्ड्स और क्लाइमेट फंडिंग भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
UPSC के लिए महत्त्व:
अर्थव्यवस्था + पर्यावरण + नीति का संयोजन — GS Paper III का पसंदीदा क्षेत्र।
Prelims में तथ्यात्मक प्रश्न और Mains में नीति आधारित विश्लेषण की संभावना।
7. COP सम्मेलनों और वैश्विक पर्यावरणीय शासन:
भारत की भूमिका COP28 (दुबई, 2023) से लेकर COP30 (ब्राज़ील, 2025) तक सक्रिय रही है। इसमें पेरिस समझौता, ग्लोबल स्टॉकटेक, और लॉस एंड डैमेज फंड जैसी व्यवस्थाएँ महत्वपूर्ण हैं।
UPSC के लिए महत्त्व:
हालिया COP निष्कर्षों पर UPSC में बार-बार प्रश्न आते हैं।
GS Paper II और GS Paper III दोनों में लागू।
8. हरित ऊर्जा, रोजगार और ‘जस्ट ट्रांजिशन’:
हरित ऊर्जा क्रांति से लाखों नए रोजगार उत्पन्न होंगे, परंतु जीवाश्म ईंधन उद्योग के श्रमिकों को साथ लेकर चलना भी आवश्यक है। इसे ही ‘Just Transition’ कहा जाता है।
UPSC के लिए महत्त्व:
समाज + अर्थव्यवस्था + नैतिकता का सुंदर संयोजन — Essay और GS IV दोनों के लिए उपयोगी।
9. भारत की स्थानीय पर्यावरणीय नीतियाँ:
NAPCC और SAPCCs
NCAP (National Clean Air Programme)
Plastic Waste Rules 2022, Wetlands Rules 2017
Forest Conservation (Amendment) Act 2023
UPSC के लिए महत्त्व:
Prelims के तथ्यात्मक प्रश्न और Mains की नीति समीक्षा दोनों में अपेक्षित।
निष्कर्ष:
जलवायु परिवर्तन और हरित ऊर्जा, भारत के आर्थिक विकास, सामाजिक न्याय और वैश्विक विश्वसनीयता को जोड़ने वाले धागे हैं। UPSC की दृष्टि से यह विषय इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी पेपर्स को जोड़ता है, और प्रशासनिक दृष्टिकोण से विकास तथा पर्यावरणीय विवेक के संतुलन की परीक्षा लेता है।

